5 lines short stories with moral in hindi

5 lines short stories with moral

1. Life में कभी घमण्ड न करें

ये कहानी है एक मुर्गे की जो एक ऐसे परिवार के बीच रहता था जिनके घर में शैतानीं हरकत करने वाले कुछ बच्चे रहते थे। ( 5 lines moral short stories ) 

मुर्गे का उस घर में एक ही काम होता था, और वो था सुबह में आवाज देकर सबको जगा देना।

घर के जो बच्चे थे वो हमेसा मुर्गे को बहुत तंग करते रहते थे,

जिससे मुर्गा हमेशा बहुत परेशान सा रहता था, बच्चों कि ये हरकत मुर्गे को थोड़ी सी भी पसंद नहीं आती थी।

एक दिन मुर्गे ने उन सबको सबक सिखाने के एक लिये एक प्लान बनाया

और सोचा कि अगर मैं कल सुबह बोलूँगा ही नहीं तो सब सोते ही रह जायेगे और फिर सबको मेरी अहमियत समझ में आयेगी।

अगले दिन मुर्गा अपने प्लान के हिसाब से सुबह नहीं बोला, लेकिन उसने देखा कि बिना उसके बोले ही सब लोग उठ गये और नहा धोकर काम पर जा रहे हैं।

और इस बात से मुर्गे को समझ में आ गयी कि किसी का काम किसी के बिना रुका नहीं रहता।

Moral of the Story: हमें भी ये बात समझ लेनी चाहिये कि कभी किसी का काम किसी के बिना रुका नहीं रहता और इसीलिये कभी भी किसी बात पर घमंड न करें और ये न सोचें कि मेरे बिना किसी का कुछ हो नहीं सकता।

 

2. ताला, चाभी और हथौड़ा

एक शहर में एक ताला-चाभी बनाने की factory  थी जहाँ पर हर तरह के ताले और चाभी बनाये जाते थे।

चाभी को बनाने के लिये और किसी ताले को तोड़ने के लिये, चाभी बनाने वाला एक हथौड़े के इस्तेमाल करता था, जो कि बहुत शक्तिशाली और मजबूत होता है, आपको पता ही होगा।

हथौड़े ने एक दिन देखा कि जिस ताले को तोड़ने के लिये उसे बहुत मेहनत और शक्ति का प्रयोग करना पड़ता है,

एक छोटी सी चाभी उसे बड़ी आसानी से खोल देती है।

ये बात हथौड़े को कुछ समझ नहीं आ रही थी।

और उसने एक दिन चाभी से पूछा, कि जिस ताले को तोड़ने के लिये मुझे इतनी ताकत लगानी पड़ती है,

इतनी मेहनत करनी पड़ती है, उसे तुम इतनी से कैसे खोल देती हो।

Moral of 5 lines short stories

चाभी ने हँसकर जवाब दिया कि तुम उसे खोलने के लिये अपनी ताकत और बल का प्रयोग करके जबरदस्ती खोलने की कोशिश करते हो,

लेकिन मैं उसके अंतरात्मा में जाकर विनम्र भाव से निवेदन एवम्‌ विनंती करके खोलने की कोशिश करती हूँ

और इसीलिये वो मुझसे बड़ी आसानी से खुल जाता है।

Moral of this short story: सबसे दया-भाव से पेश आयें (Be Kind to Everyone)

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि आप चाहे जितना भी ताकतवर क्यों न हो, आप जिस काम को प्यार और विनम्रता से करा सकते हो वो आप अपनी शक्ति और बल से कभी नहीं करा सकते।

 

3. चतुर खरगोश
( Lion and Rabbit Story )

एक बार सभी जानवरों ने मिलकर शेर के साथ समझौता कर लिया कि रोजाना एक पशु शेर के भोजन के लिए स्वयं उसके पास चला आएगा|

शेर यह बात मान गया|

उस दिन से रोज एक जानवर अपनी बारी से शेर के पास पहुंच जाता और दूसरे जानवर बिना डर के जंगल में घूमते|

एक बार खरगोश की बारी आई|

वह धीरे-धीरे शेर के पास जा ही रहा था कि अचानक रास्ते में उसे एक तरकीब सूझी|

वह बहुत देर करके शेर के पास पहुंचा| शेर भूखा होने के कारण बेचैन अपनी गुफा के बाहर चक्कर लगा रहा था|

खरगोश को देखते ही शेर गरजा और बोला:-” अरे खरगोश! तुम इतनी देर से क्यों आए हो? भूख से मेरी जान निकली जा रही है|”

खरगोश बोला:-” महाराज! क्या बताऊं, हम पांच भाई आपकी सेवा के लिए आ ही रहे थे, परंतु रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया|

वह बोला कि वह जंगल का राजा है|

उसने हम पर हमला कर दिया और मेरे भाइयों को खा गया|

महाराज, मैं किसी तरह अपनी जान बचाकर आपको यह संदेश देने पहुंचा हूं|”

यह बात सुनकर शेर बहुत क्रोधित हुआ और बोला:-“कहां है वह दुष्ट, जो अपने आप को राजा बता रहा है|

मुझे दिखाओ, मैं अभी उसका काम तमाम करता हूं|”

खरगोश, शेर को कुएं के पास ले गया| जब शेर ने कुएं में झांका तो उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी|

उसे दूसरा शेर समझ कर वह जोर से गरजा और क्रोधित होकर उस कुएं के अंदर छलांग लगा दी|

परंतु उस कुँए के अंदर कोई दूसरा शेर था ही नहीं| वहां तो केवल जल ही जल था|

बाहर निकलने का कोई रास्ता भी नहीं था|

शेर बहुत देर तक पानी के अंदर ही छटपटाता रहा और डूब कर वहीं मर गया|

Related :- Moral stories in hindi

इस प्रकार नन्हे खरगोश ने अपनी चतुराई से अपनी तथा अन्य साथियों की जान बचाई|

बुद्धि और विवेक के बल पर कोई भी कार्य संभव है |

4. हिंसा की सजा

भगवान श्री राम बहुत ही न्याय प्रिय राजा थे| वह प्रतिदिन लोगों की मुश्किलें हल करने की कोशिश करते थे|

एक दिन शाम को उन्होंने लक्ष्मण को बाहर जाकर देखने को कहा कि कोई और व्यक्ति तो इंतजार नहीं कर रहा है

बाहर जाकर लक्ष्मण की नजर एक कुत्ते पर पड़ी जो बहुत उदास बैठा था| लक्ष्मण ने उससे पूछा कि तुम उदास क्यों हो?

कुत्ता बोला:- मैं राम से न्याय चाहता हूं| लक्ष्मण उसे अंदर ले गए|

कुत्ते ने राजा भगवान् रामचंद्र जी को प्रणाम किया और कहा,

हे राम, मैं न्याय चाहता हूं|मेरी साथ बेवजह हिंसा की गई है| स्वार्थ सिद्ध नाम के व्यक्ति ने बिना किसी वजह मेरे सिर पर डंडे से वार किया |

भगवान् राम ने तत्काल स्वार्थ सिद्ध को बुलाया| उसने स्वीकार किया कि मैं इस कुत्ते का अपराधी हूं|

मैं भूख से परेशान और निराश था|

यह कुत्ता रास्ते में बैठा हुआ था इसलिए गुस्से में मैंने इसके सिर पर मार दिया| आप मुझे जो सजा देना चाहें मुझे स्वीकार है|

राम ने इस बारे में मंत्रियों और दरबारियों की सलाह ली परंतु कोई कुछ ना कह सका|

राम ने कुत्ते से ही पूछा, तुम ही बताओ|

कुत्ते ने कहा, इसे कालिंजर मठ का महंत बना दीजिए| भगवान् राम ने कहा,  तथास्तु|

यह सुनकर दरबारियों को हैरानी हुई और सोचने लगे कि यह दंड है या पुरस्कार?

कुत्ते ने कहा, पिछले जन्म में मैं इसी मठ का महंत था |

अपनी प्रसिद्धि को देखकर मैं अपना कर्तव्य भूल बैठा था और अहंकारी हो गया था,

जिसके परिणाम स्वरुप मुझे कुत्ते की योनि में जन्म मिला है| .

स्वार्थ सिद्ध में गुस्सा है, अहंकार है| इसलिए उसकी भी वही गति होगी जो मेरी हुई है|

Moral of the short stories:- अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है |

(5 lines short stories with moral)

Source :- Hindikahani