moral stories in hindi for school student

Moral stories in hindi for school student

1.बिल्ली बच गई

ढोलू – मोलू दो भाई थे।( Hindi short stories with moral for kids )

दोनों खूब खेलते , पढ़ाई करते और कभी-कभी खूब लड़ाई भी करते थे।

एक दिन दोनों अपने घर के पीछे खेल रहे थे।

वहां एक कमरे में बिल्ली के दो छोटे-छोटे बच्चे थे।

बिल्ली की मां कहीं गई हुई थी , दोनों बच्चे अकेले थे।

उन्हें भूख लगी हुई थी इसलिए खूब रो रहे थे।

ढोलू – मोलू ने दोनों बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनी और अपने दादाजी को बुला कर लाए।

दादा जी ने देखा दोनों बिल्ली के बच्चे भूखे थे। दादा जी ने उन दोनों बिल्ली के बच्चों को खाना खिलाया और एक एक कटोरी दूध पिलाई। अब बिल्ली की भूख शांत हो गई। वह दोनों आपस में खेलने लगे। इसे देखकर ढोलू – मोलू बोले बिल्ली बच गई दादाजी ने ढोलू – मोलू को शाबाशी दी।

नैतिक शिक्षा –

दूसरों की भलाई करने से ख़ुशी मिलती है।

 

2.रितेश के तीन खरगोश

रितेश कक्षा तीसरी में पढ़ता था।  उसके पास तीन छोटे प्यारे प्यारे खरगोश थे।  रितेश अपने खरगोश को बहुत प्यार करता था। वह स्कूल जाने से पहले पार्क से हरे-भरे कोमल घास लाकर अपने खरगोश को खिलाता था। और फिर स्कूल जाता था।  स्कूल से आकर भी उनके लिए घास लाता था।

moral stories in hindi for kids

एक दिन की बात है रितेश को स्कूल के लिए देरी हो रही थी। वह घास नहीं ला सका , और स्कूल चला गया। जब स्कूल से आया तो खरगोश अपने घर में नहीं थे। रितेश ने खूब ढूंढा परंतु कहीं नहीं मिले। सब लोगों से पूछा मगर खरगोश कहीं भी नहीं मिले।

रितेश उदास हो गया रो-रोकर आंखें लाल हो गई। रितेश अब पार्क में बैठ कर रोने लगा। कुछ देर बाद वह देखता है कि उसके तीनों खरगोश घास खा रहे थे , और खेल रहे थे। रितेश को खुशी हुई और वह समझ गया कि इन को भूख लगी थी इसलिए यह पार्क में आए हैं। मुझे भूख लगती है तो मैं मां से खाना मांग लेता हूं। पर इनकी तो माँ भी नहीं है। उसे दुख भी हुआ और खरगोश को मिलने की खुशी हुई।

इस कहानी से हमें नैतिक शिक्षा मिलती है कि

जो दूसरों के दर्द को समझता है उसे दुःख छू भी नहीं पता।

 

3.दोस्त का महत्व

वेद गर्मी की छुट्टी में अपनी नानी के घर जाता है। वहां वेद को खूब मजा आता है , क्योंकि नानी के आम का बगीचा है। वहां वेद ढेर सारे आम खाता है और खेलता है। उसके पांच दोस्त भी हैं , पर उन्हें बेद आम नहीं खिलाता है।

एक  दिन की बात है , वेद को खेलते खेलते चोट लग गई। वेद के दोस्तों ने वेद  को उठाकर घर पहुंचाया और उसकी मम्मी से उसके चोट लगने की बात बताई , इस पर वेद को मालिश किया गया।

मम्मी ने उन दोस्तों को धन्यवाद किया और उन्हें ढेर सारे आम खिलाएं। वेद जब ठीक हुआ तो उसे दोस्त का महत्व समझ में आ गया था। अब वह उनके साथ खेलता और खूब आम खाता था।

 

moral stories in Hindi  –

दोस्त सुख – दुःख के साथी होते है। उनसे प्यार करना चाहिए कोई बात छुपाना नहीं चाहिए।

 

4.शेर और चूहा

एक जंगल था|

जंगल का राजा शेर एक दिन पेड़ की छाया में सो रहा था|

एक छोटा चूहा अपने बिल से दौड़ कर आया और शेर की नाक पर उछल-कूद करने लगा|

इससे शेर जाग गया|

शेर ने चूहे को अपने पंजे में दबोच लिया|

चूहा बोला- मुझे माफ कर दीजिए|

मुझसे अनजाने में गलती हो गई है|

मुझे न मारे|

किसी दिन मैं भी आपके काम आ सकता हूँ|

शेर चूहे की बात सुनकर हँस पड़ा|

एक छोटा सा जानवर इतने बड़े शेर का किस प्रकार भला कर सकता है?

परंतु शेर को उस पर दया आ गयी|

उसने चूहे को छोड़ दिया तथा उसे चेतावनी दी कि फिर कभी मुझे नींद से मत जगाना|

चूहा भाग कर अपने बिल में घुस गया|

कुछ दिन बाद एक शिकारी जंगल में आया|

वह अपना जाल बिछाकर चला गया|

शेर शिकारी द्वारा फैलाए जाल में फँस गया|

शेर ने जाल की रस्सी को तोड़ने की कोशिश की परंतु वह असफल रहा|

इस पर वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा|

शेर की दहाड़ सुनकर चूहा अपने बिल से बाहर आया चूहा शेर से बोला, तुम चुपचाप लेटे रहो|

मैं तुम्हें अभी आजाद करता हूँ|

चूहे ने धीरे-धीरे जाल को कुतर दिया|

शेर जाल से बाहर आ गया|

शेर ने अपने मित्र चूहे को धन्यवाद किया|

और कहा आज मैं जान गया कि छोटा सा जानवर भी बड़े जानवरों की विपति में सहायक हो सकता है|

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि 

हमें  जरूरत के समय सभी की मदद करनी चाहिए क्योकि जब हम किसी की मदद करेंगे तभी तो कोई जरूरत के समय हमारी मदद करेगा|

अथार्थ कर भला सो हो भला |

 

5.प्यासा कौआ ( A Thirsty Crow Story )

एक बार बड़ी ही भयानक गरमी पड़ रही थी|एक कौआ कई घंटे से आकाश में उड़ रहा था| तेज गर्मी और लगातार उड़ते रहने से उसे बहुत तेज प्यास लगने लगी|प्यास बुझाने के लिए वह कुछ नीचे उतरा और इधर-उधर पानी की तलाश करने लगा| परंतु आस-पास कहीं भी उसे पानी दिखाई नहीं दिया|

‘ओह! अगर मुझे जल्दी ही पानी नहीं मिला तो जान ही निकल जाएगी|” कौए ने सोचा|

तभी अचानक कौए को दूर एक पानी का घड़ा नजर आया| वह तुरंत उड़ता हुआ वहां पहुंचा और घड़े में झांकने लगा|घड़े में पानी तो था, मगर एह घड़े में इतना नीचे था कि कौआ वहां तक अपनी चोंच डालकर पानी नहीं पी सकता था|

कौआ परेशान होकर सोचने लगा – ‘अब क्या करूं? कैसे अपनी चोंच पानी तक पहुंचाऊं?’

तभी उसकी बुद्धि में एक तरकीब आई| घड़े के पास ही कुछ कंकड़-पत्थर पड़े थे| कौआ अपनी चोंच में कंकड़ लेकर घड़े के पास पहुंचा और कंकड़ घड़े में डाल दिया| उसने कई कंकड़ घड़े में डाले|

वह यह देखकर प्रसन्न हो गया कि घड़े में पानी का स्तर धीरे-धीरे ऊंचा उठने लगा| कौए को आशा बंधी कि अब वह पानी पी सकेगा| अपनी इस तरकीब की सफलता से खुश होकर वह दुगने उत्साह से घड़े में कंकड़ डालने में जुट गया|

अंत में उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई| पानी का स्तर ऊपर उठकर घड़े के मुंह तक पहुंच गया|

अब कौआ बहुत आसानी से पानी पी सकता था| कौए ने छक कर पानी पिया और संतुष्ट होकर दोबारा आकाश में उड़ गया|

शिक्षा:

जिस प्रकार कौए ने ठान लिया था की वह इस मटके से पानी पीकर रहेगा , उसी प्रकार यदि व्यक्ति भी ठान ले तो वह भी असंभव से असंभव कार्य को भी बड़ी सरलता से कर सकता है |.

 

6.लकड़हारा और व्यापारी

एक गाँव में एक गरीब लड़का रहता था जिसका नाम मोहन था । मोहन बहुत मेहनती था लेकिन थोड़ा कम पढ़ा लिखा होने की वजह से उसे नौकरी नहीं मिल पा रही थी । ऐसे ही एक दिन भटकता भटकता एक लकड़ी के व्यापारी के पास पहुँचा । उस व्यापारी ने लड़के की दशा देखकर उसे जंगल से पेड़ कटाने का काम दिया ।

मोहन अब एक लकड़हारा बन गया था| नयी नौकरी से मोहन बहुत उत्साहित था , वह जंगल गया और पहले ही दिन 18 पेड़ काट डाले। व्यापारी ने भी मोहन को शाबाशी दी , शाबाशी सुनकर मोहन और गदगद हो गया और अगले दिन और ज्यादा मेहनत से काम किया । लेकिन ये क्या ? वह केवल 15 पेड़ ही काट पाया । व्यापारी ने कहा – कोई बात नहीं मेहनत करते रहो ।

तीसरे दिन उसने और ज्यादा जोर लगाया लेकिन केवल 10 पेड़ ही ला सका । अब मोहन बड़ा दुखी हुआ लेकिन वह खुद नहीं समझ पा रहा था क्युकी वह रोज पहले से ज्यादा काम करता लेकिन पेड़ कम काट पाता । हारकर उसने व्यापारी से ही पूछा – मैं सारे दिन मेहनत से काम करता हूँ लेकिन फिर भी क्यों पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है । व्यापारी ने पूछा – तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार कब लगायी थी । मोहन बोला – धार ? मेरे पास तो धार लगाने का समय ही नहीं बचता मैं तो सारे दिन पेड़ कटाने में व्यस्त रहता हूँ । व्यापारी – बस इसीलिए तुम्हारी पेड़ों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है ।

Top 10 moral hindi stories

मित्रों यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है , हम रोज सुबह नौकरी पेशा करने जाते हैं , खूब काम करते हैं पर हम अपनी कुल्हाड़ी रूपी Skills को Improve नहीं करते हैं । हम जिंदगी जीने में इतने ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं कि अपने शरीर को भी कुल्हाड़ी की तरह धार नहीं दे पाते और फलस्वरूप हम दुखी रहते हैं ।

मित्रों कठिन परिश्रम करना कोई बुरी बात नहीं है पर Smart Work , Hard Work से ज्यादा अच्छा होता है |

Source :-Hindivibhag