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Stories of hindi moral – माँ की महानता 

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Hindi moral stories – माँ की महानता

माँ की महानता 

दोस्तों आज की कहानी बहुत ही मनोरंजक और भावपूर्ण है| हम सभी जानते है कि इस संसार में केवल एक ही व्यक्ति है जो हमसे बिना किसी स्वार्थ के प्रेम (love) करना है जी हां सोतो हम बात कर रहे है हमारी माँ| (moral stories of hindi)

दोस्तों केवल माँ ही इस पुरे संसार में एक मात्र ऐसी व्यक्ति है जो अपने बच्चो से बिना किसी स्वार्थ के प्यार करती है

अब आप कहेंगे कि पिता भी तो अपने बच्चों से निस्वार्थ प्रेम करता है

बिल्कुल दोस्तों पर उतना नही जितना माँ|

जी हां और ये बात आपको हमारी आज की कहानी पढ़ कर जरूर पता चल जायेगा |

तो चलिए दोस्तों शुरू करते है आज की कहानी |

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एक बार एक जिज्ञासु ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा,

संसार में माँ की महानता क्यों गाई जाती है?’

स्वामीजी ने इस पर मुस्कुराते हुए उस व्यक्ति से पूछा,

पाँच सेर का एक पत्थर ले आओ,’जब वह व्यक्ति पत्थर ले आया,

तो स्वामीजी ने कहा, ‘इसे कपड़े से लपेट कर पेट पर बाँध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आओ,’

उस आदमी ने ऐसा ही किया, लेकिन कुछ घंटों में उसके लिए काम करना मुश्किल हो गया.

उसे दिन में ही तारे नजर आने लगे. तब वह थका-मांदा स्वामीजी के पास आया और बोला,

अब मैं इस बोझ को और नहीं उठा सकता.

आपने एक सवाल पूछने की इतनी बड़ी सजा मुझे क्यों दी  ?’

स्वामीजी ने कहा, इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं सहा गया और माँ पूरे नौ मास तक शिशु का बोझ उठाती है.

इस बोझ के साथ वह सारा काम करती है और कभी विचलित नहीं होती.

माँ से ज्यादा सहनशील कौन है ? इसलिए माँ की महिमा सबसे ज्यादा है.

तो दोस्तों स्वामी विवेकानंद जी इस कहानी के माध्यम से यही बताना चाहते थे कि माँ वो इनसान है इस दुनिया में जो अपने बच्चो का बोझ मरते दम उठाती है. माँ सदेव अपने बच्चो का भला ही चाहती है.

Source : Behtarlife

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