very short moral stories in hindi for class 8

Very short moral stories in Hindi

1. चतुर किसान

एक बार एक किसान एक बकरी, घास का एक गट्ठर और एक शेर को लिए नदी के किनारे खड़ा था। ( short moral stories in Hindi )

उसे नाव से नदी पार करनी थी लेकिन नाव बहुत छोटी थी वह सारे सामान समेत एक बार में पार नहीं कर सकता था।

किसान ने कुछ तरकीब सोची। वह अगर शेर को पहले ले जाकर नदी पार छोड़ आता है तो इधर बकरी घास खा जाएगी और अगर घास को पहले नदी पार ले जाता है तो शेर बकरी खा जाएगा।

अंत में उसे एक समाधान सूझ गया। उसने पहले बकरी को साथ में लिया और नाव में बैठकर नदी के पार छोड़ आया। इसके बाद दूसरे चक्कर में उसने शेर को नदी पार छोड़ दिया लेकिन लौटते समय बकरी को फिर से साथ ले आया।

इस बार वह बकरी को इसी तरफ छोड़कर घास के गट्ठर को दूसरी और शेर के पास छोड़ आया।

इसके बाद वह फिर से नाव लेकर आया और बकरी को भी ले गया। इस प्रकार उसने नदी पार कर ली और उसे कोई हानि भी नहीं हुई।

तो दोस्तों, इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि

बुद्धिमता ही सबसे बड़ा वरदान है यदि हम अपनी बुद्धि और ज्ञान का उयोग सही तरह से करे तो हम किसी भी परेशानी का समाधान निकाल सकते है। 

2. मुहँ से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते

एक किसान ने अपने पड़ोसी की निंदा की ।

अपनी गलती का अहसास होने पर वह पादरी के पास क्षमा मांगने गया ।

पादरी ने उसको कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोंबीच बिखेर दे ।

किसान ने वही किया, फिर पादरी ने कहा की जाओ और अब सभी पंख थैले में भर लाओ ।

किसान ने ऐसा करने की बहुत कोशिश की, मगर सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ गए थे ।

जब वह खाली थैला लेकर लौटा, तो पादरी ने कहा कि यही बात हमारे जीवन पर लागू होती है ।

तुमने बात तो आसानी से कह दी, लेकिन उसे वापस नहीं ले सकते, इसलिए शब्दों के चुनाव ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए ।

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तो दोस्तों,इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि

जैसे कि कहा जाता है कि हमारी जबान पर देवी सरस्वती बैठी होती है इसलिए हमें किसी बात को बोलने से पहले 1000 बार सोच लेना चाहिए|

क्योकि दोस्तों किसी बात को बोलने के बाद हम अपनी कही बातों को वापस नहीं ले सकते ।

 

3. क्या सुख क्या दुःख

एक खरगोश अपना सामान उठाकर खुशी-खुशी जा रहा था उसे रास्ते में एक हिरन मिला ।

हिरन ने कहा – क्या बात है खरगोश मियाँ, बड़े खुश नजर आ रहे हो ।

खरगोश बोला :- मेरी शादी हो गई है ।

हिरन ने कहा :- बड़े भाग्यशाली हो भाई,

खरगोश ने उत्तर दिया :- शायद नहीं, क्योंकि मेरी शादी एक बहुत ही घमंडी खरगोशनी से कर दी गई है ।

उसने मुझसे बड़ा घर, ढेर सारे पैसे और कपड़े माँगे, जो मेरे पास नहीं थे ।

हिरन ने धीरे से कहा :- बड़े दुःख की बात है न |

खरगोश बोला :- शायद नहीं, क्योंकि मैं उसे बहुत चाहता हूँ । इसीलिए मैं खुश हूँ कि वह मेरे साथ तो है ।

हिरन खुश होकर बोला :- वाह, बड़े भाग्यशाली हो भाई ।

खरगोश ने कहा :- शायद नहीं भैया, क्योंकि शादी के अगले ही दिन मेरे घर में आग लग गई ।

हिरन बोला :- अरे रे। ……बड़े दुःख की बात है ।

खरगोश बोला :- शायद नहीं, क्योंकि मैं अपना सामान बाहर निकाल लाया और उसे जलने से बचा लिया ।

हिरन ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा :- अच्छा बड़े भाग्यशाली हो भाई ।

खरगोश ने उदास स्वर में कहा :- नहीं भाई, शायद नहीं, क्योंकि जब आग लगी तो मेरी पत्नी अंदर सो रही थी ।

हिरन बोला :- ओहो, ये तो बड़े दुःख की बात है ।

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खरगोश ने मुस्कुराते हुए कहा :- नहीं, नहीं बिलकुल नहीं, क्योंकि मैं आग में कूद पड़ा और अपनी प्यारी पत्नी को सही-सलामत बाहर निकाल लाया ।

और जानते है सबसे अच्छी बात क्या हुई । इस घटना से उनसे सीख लिया है कि सबसे प्यारी चीज है जिंदगी ।

पैसा, घर और कपड़े हों या न हों लेकिन आपस का प्यार होना बहुत जरूरी है!

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि

जीवन में सुख और दुःख साथ साथ आते और जाते रहते है लेकिन जीवन में रिश्ते यदि एक बार चले जाए तो दुबारा नहीं आते इसलिए हमें अपने रिश्तो को अच्छे से निभाना चाहिए ।

 

4. लालच बुरी बला

एक पिता अपने दोनों बेटों से बहुत प्यार करते थे।

यह सोच कि शहर चले जाएँ तो दोनों बेटों का भविष्य उज्जवल हो जाएगा, उन्होंने अपना पुश्तेनी घर बेच दिया।

गांव में चोरियाँ बहुत हो रही थी इस लिए वो सारा पैसा उन्होंने एक खेत में गाड़ दिया।

घर पहुँच कर घर बेचने की बात दोनों बेटों को बताई और यह भी बताया कि घर का नया मालिक एक दो दिन में यहाँ रहने आ जाएगा।

इसलिए तैयारी करो शहर चलने की।

घर बिकने की बात सुन दोनों बेटों के मन में खोट आ गया।

दोनों सोचने लगे की क्यों न मैं ही सारा पैसा हड़प लूँ।

तरकीब सोचते हुए दोनों अपने पिता के पास गए और पूछा ” पर पैसा तो आप लाए नहीं।”

पिता ने उत्तर दिया ” अरे, सारे पैसे मेरे पास हैं, तुम दोनों चिंता मत करो।” 

रात को बड़ा बेटा उठा और सोते हुए पिता के सामान की तलाशी लेने लगा।

तभी छोटा बेटा भी वहाँ पैसा ढूँढ़ते हुए पहुँच गया। एक दूसरे को देख दोनों घबरा गए।

तब फुसफुसाते हुए दोनों ने तय किया कि इस बूढ़े पिता को साथ ले जा कर क्या करेंगे।

क्यों न हम दोनों मिल कर पैसा ढूंढे।

जब पैसा मिल जाएगा तो उसका बराबर बँटवारा कर शहर भाग जाएंगे।  

उन्हें पता ही नहीं चला, पिता की नींद खुल गयी थी और वो उनकी सारी बातें सुन रहे थे।

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अपनी पत्नी की मौत के बाद इतने प्यार से पाला था इन दोनों बेटों को और आज वही उसे धोखा दे रहे हैं। 

अगले दिन उन्होंने सारा पैसा जमीन से निकाला और एक वृद्ध आश्रम को दान कर दिया।

 वो अपने बेटों की घृणित सोच से इतने दुखी हुए की उन्होंने फ़ौरन घर छोड़ दिया और साधू का वेश धारण कर गाँव से हमेशा के लिए चले गए। 

दूसरे दिन नया मकान मालिक आया और उसने दोनों बेटों को घर से निकाल दिया। 

अब दोनों के पास ना पिता था, ना घर था, और ना ही पैसा। 

तो दोस्तों इस कहानी से हमने सिखा कि,

लालच की वजह से दोनों के हाथ से पैसा भी गया और पिता का प्यार भी। तभी कहते हैं ” लालच बुरी बला है “

 

5. भालू और दो मित्र

(Very Short Stories With Morals : Bear And Two Friends)

दो दोस्त एक घने जंगल से होकर कहीं जा रहे थे.

दोनों काफ़ी गहरे दोस्त थे और अपनी दोस्ती को लेकर दोनों ही बातें करते हुए जा रहे थे.

जंगल बहुत ही घना था, तो उनमें से एक दोस्त (friend) डर रहा था,

लेकिन उसके साथी मित्र ने कहा कि मेरे होते हुए तुम्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं.

मैं तुम्हारा सच्चा और अच्छा मित्र हूं.

इतने में ही सामने से ही बहुत ही बड़ा भालू (bear) उन्हें नज़र आया.

जो दोस्त कह रहा था कि मैं अच्छा मित्र हूं, वो भालू को देखते ही भाग खड़ा हुआ.

दूसरा मित्र कहता रहा कि मुझे छोड़कर मत भागो, लेकिन वो भागते हुए एक पेड़ पर चढ़ गया.

यह देख उसका मित्र और भी डर गया, क्योंकि वो पेड़ पर चढ़ना नहीं जानता था.

इतने में वो भालू और भी नज़दीक आ गया था.

जब वो बेहद क़रीब आने लगा,

तो दूसरे मित्र के पास कोई चारा नहीं रहा और वो वहीं नीचे ज़मीन पर आंखें बंद करके लेट गया.

पेड़ पर चढ़ा मित्र यह सारा नज़ारा देख रहा था और

वो सोचने लगा कि ऐसे तो यह मर जाएगा.

इतने में ही वो भालू नीचे लेटे मित्र के क़रीब आकर उसे देखने लगा, उसे सूंघा और उसके शरीर का पूरी तरह मुआयना करके आगे बढ़ गया.

ज़मीन पर लेटे मित्र ने राहत की सांस ली और वो सोचने लगा कि अच्छा हुआ जो मैंने सांस रोक ली थी, क्योंकि भालू मुर्दों को नहीं खाते और वो भालू मुझे मरा हुआ जानकर आगे बढ़ गया.

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पेड़ पर चढ़ा मित्र बहुत हैरान था.

भालू के जाने के बाद वो नीचे उतरा और उसने अपने मित्र से पूछा कि आख़िर उसने क्या किया था और वो भालू उसके कान में क्या कह रहा था.

मुर्दा होने का नाटक कर रहे मित्र ने कहा कि भालू ने मेरे कान में कहा कि बुरे वक्त़ में ही सही दोस्तों की पहचान होती है, इसलिए कभी भी ऐसे दोस्तों के साथ मत रहो, जो बुरा समय देखकर तुम्हें अकेले छोड़कर भाग जाएं और जो वक्त़ पर काम ही न आएं.

दूसरे मित्र को समझते देर न लगी और फिर दोनों आगे बढ़ गए

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि

सच्चा दोस्त वही होता है, जो बुरे से बुरे वक्त़ में भी अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ता और मुसीबत के समय अपने मित्र की मदद करता है.

Source :- merisaheli