जानिए माँ दुर्गा और महिषासुर की अद्भुत पौराणिक कहानी।

बहुत समय पहले महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। 

अपनी शक्ति और वरदान के कारण उसे अपनी अजेयता पर घमंड हो गया।

महिषासुर ने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया। 

भयभीत देवता सहायता के लिए एकजुट हुए।

सभी देवताओं ने मिलकर दिव्य शक्ति का आह्वान किया। उनकी संयुक्त दिव्य ऊर्जा से एक अद्भुत शक्ति प्रकट होने लगी।

दिव्य तेज से माँ दुर्गा प्रकट हुईं। दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र और सिंह की सवारी के साथ वे अधर्म का अंत करने आईं।

माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ। दोनों की शक्तियों से पूरा रणक्षेत्र गूँज उठा।

मान्यता के अनुसार, यह युद्ध नौ दिनों तक चला। महिषासुर ने अनेक रूप धारण किए, लेकिन माँ दुर्गा अडिग रहीं।

दसवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। यह विजय अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बनी।

इसी पौराणिक मान्यता से जुड़कर भक्त नौ दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया से उत्सव की रौनक बढ़ जाती है।

नवरात्रि हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। जय माता दी! 🙏

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